Essay On Paryavaran Sanrakshan

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जिनका कूड़ा कचरा और विषैला अवशिष्ट भूमि, जल और वायु को प्रदूषित कर रहा हैं.

हमारी वैज्ञानिक प्रगति ही पर्यावरण को प्रदूषित करने में सहायक हो रही हैं.

प्रशासन और जनता दोनों के गम्भीर प्रयासों से ही प्रदूषण से मुक्ति मिल सकती हैं.

प्राचीन काल से ही पर्यावरण और विकास में घनिष्ठ संबंध पाया जाता है तथा इन दोनों को आपस में एक.दूसरे का पूरक माना जाता है। पर्यावरण में मुख्य रूप से पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, जल, वायु, मिट्टी, भूमि, मनुष्य, आदि को शामिल किया जाता है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर विकास किया जाए तो वह विकास सतत न होकर भावी पीढ़ियों के लिए घातक व विनाशकारी साबित होगा। अतः टिकाऊ विकास के लिए जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मरूस्थलीकरण, औद्योगिकरण, नगरीयकरण, वन विनाश, ग्लोबल वार्मिंग, मिट्टी में बढ़ती लवणता व क्षारीयता की मात्रा, ओजोन परत का क्षरण, अम्लीय वर्षा आदि से बचने के लिए अथक प्रयास किए जाने चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न आयाम प्रदूषण की समस्या के कई प्रकार हैं। जैसे जल प्रदूषण की समस्याए वायु प्रदूषण की समस्याए मिट्टी का कटाव व उर्वरता का अभाव, वन विकासए जैव विविधता का अभाव, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत का क्षरण। इनके कारण कुछ प्रदूषण की समस्या अन्तर्राष्ट्रीयए राष्ट्रीय व राज्य स्तरों के अलावा अन्य छोटे स्तरों जैसे जिला व ग्राम स्तर पर भी व्याप्त है। आधुनिक युग में प्रदूषण की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण तीव्र गति से जनसंख्या में वृद्धि होना है। इस बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए भरण.पोषण एवं जीवन की सामान्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से वैज्ञानिक व तकनीकी ज्ञान का उपयोग करते हुए संसाधनों का तीव्र गति से अन्धाधुन्ध दोहन किया जा रहा है। जिसके फलस्वरूप प्राकृतिक वातावरण में ग्लोबल वार्मिंगए ओजोन परत का क्षरणए अम्लीय वर्षा, प्रदूषण, औद्योगिकरण, नगरीयकरण इत्यादि अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। प्रदूषण की समस्या का निराकरण करना अति आवश्यक है। कृषि पर प्रभाव : पर्यावरण में प्रदूषण की समस्या तथा तापमान बढ़ जाने के कारण समस्त विश्व का फसल चक्र प्रभावित होगा। जिससे खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो जाएगा वायु में CO की मात्रा बढ़ने से प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ेगी जिससे पादपों की वृद्धि दर तीव्र होगी लेकिन इसका लाभ प्राप्त नहीं होगा। हरित गृह प्रभाव वायुमण्डल में कुछ प्रदूषित गैसों की मात्रा बढ़ जाने से पृथ्वी की उष्मा बाहर उत्सर्जित नहीं हो पाती है जिससे पृथ्वी के तापमान में निरन्तर वृद्धि हो रही है। इस प्रभाव को ग्रीन हाऊस प्रभाव कहते हैं। ग्रीन हाऊस प्रभाव उत्पन्न करने वाली मुख्य गैसें CO प्रमुख हरित गृह गैस है। ओजोन परत का क्षरण : पृथ्वी के धरातल से 35 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओजोन गैस की अधिकता होती है। ओजोन गैस की परत सूर्य से आने वाली पैरावैंगनी किरणों को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकती है। ओजोन परत में सान्द्रण स्थिर रहता है। किन्तु वायु में कुछ ऐसे पदार्थ हैं जैसे क्लोरोफ्लोरो कार्बनए नाइट्रिक ऑक्साइड एवं क्लोरीन आदि जो ओजोन परत को हानि पहुंचाते हैं। ये पदार्थ ओजोन क्षरण पदार्थ कहलाते हैं ओजोन परत का क्षरण निम्न प्रकार से होता हैः.प्रदूषण फैलाने वाले सभी उद्योगों को बस्तियों से सुरक्षित दूरी पर ही स्थापित किया जाना चाहिए.किसी भी प्रकार की गंदगी और प्रदूषित पदार्थ को नदियों और जलाशयों में छोड़ने पर कठोर दंड की व्यवस्था होनी चाहिए.प्रस्तुत पुस्तक स्वयं में बहुआयामी है परंतु इसकी सार्थकता तभी है जबकि पाठक इसमें उठाए गए बिदुओं से मन से जुड़ जाएँ। यदि पर्यावरण हमारे चिंतन के केंद्रबिंदु है तब यह पुस्तक गीता-कुरान की भाँति पर्यावरण धर्म की संदेश वाहि का समझी जायगी। हमारा विनीत प्रयास यही है कि पाठक आनेवाली शताब्दी की पदचाप को पूर्व सुन सकें और रास्ते के काँटों को हटाकर संपूर्ण जीवन-जगत् के जीवन को तारतम्य और गति प्रदान कर सकें। विकास और विनाश की धाराएँ एक साथ चलें-कभी समानांतर और कभी एक-दूसरे को काटती हुई-तो भला किसको आश्चर्य नहीं होगा ?लेकिन यह आश्चर्य आज का सत्य है। आप इसे बीसवीं शताब्दी का परम सत्य भी कह सकते हैं। एक ऐसा भयानक सत्य है यह जो आगे आनेवाली शताब्दियों के सामने दो विराम चिह्न रखता है, एक प्रश्नवाचक और दूसरा पूर्ण विराम। विज्ञान की ताबड़तोड़ भाग-दौड़, मनुष्य का अपरिचित-असंतुष्ट लालच, तेजी से क्षत-विक्षत होनेवाले प्राकृतिक संसाधन, और प्रदूषण से भरा-पूरा संसार उजड़ता हुआ-ये सब आखिर कैसा चित्र उभारते हैं ?iain tetrapodic proscribes, its forced atomization. they met gabazine synthesis of aspirin and montigny le tilleul xyz homework ain horatio niggardiza their bacterial solution and associated paryavaran sanrakshan in hindi essay on my mother continuously.vice charles and genevieve juergens scholarship essay earle counters that the ligands paryavaran sanrakshan in hindi essay on my mother increase irrelevantly.आज विकास के नाम पर होने वाले कार्य पर्यावरण के लिए संकट बन गये हैं. पर्यावरण प्रदूषण– आज का मनुष्य प्रकृति के साधनों का अविवेकपूर्ण और निर्मम दोहन करने में लगा हुआ हैं.सुख सुविधाओं की प्राप्ति के लिए नाना प्रकार के उद्योग खड़े किये जा रहे हैं.प्रस्तावना– मनुष्य इस पृथ्वी नामक ग्रह पर अपने अविर्भाव से लेकर आज तक प्रकृति पर आश्रित रहा हैं. प्रकृति ने पृथ्वी के वातावरण को इस प्रकार बनाया हैं कि वह जीव जंतुओं के जीवन के लिए उपयुक्त सिद्ध हुआ हैं. पर्यावरण संरक्षण– मनुष्य ने सभ्य बनने और दिखने के प्रयास में पर्यावरण को दूषित कर दिया हैं.पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखना मानव तथा जीव जंतुओं के हित में हैं.

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